हर शाल ही क्यों मनाया जाता हे बिजया दशमी – Why is Bijaya Dashami celebrated every year ?

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आज हम सभी ने खुद को खुस रखने केलिए शाल में ऐसा बहत सारे त्यहार को आनंद उल्लास के साथ पालन करते हे, लेकिन किसीकोभी इन सभी परब पालन करनेका पीछे की कहानी के बारे में जानते तक नहीं जैसा की हर शाल ही क्यों मनाया जाता हे बिजया दशमी – Why is Bijaya Dashami celebrated every year ? चलिए जान लेते हैं संखिप्त में इसकी बारे में ।

मेरे दोस्त आपकी जानकारी केलिए बतादेना चाहती हूँ की बिजया दशमी के दिन द्वापर युग का भगबान मरज्यादा पुरुष श्री रामचंद्र 14 शाल का बनबाश कस्ट भोग कर और लंकाधिपति राबण का बोध करके अपनी राज्य अजोध्या में पहंचे थे ।

पुराण की अनुसार आस्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय तारा उदय होनेकी समय बिजय नाम का काल होता हे, उस समय किया हुआ काम सीधी दायक होती हे ऐसा माना जातेहे ।

ये दी दशमी के दिन होने की कारण इस पर्ब को बिजया दशमी यानि दशहरा कहाजाताहे । ये पर्ब अबगुण को त्याग करके श्रेस्ठ गुण को अपनाने केलिए हमें सिक्ष्य देती हे ।

बिजया दशमी का महत्व – Significance of Bijaya Dashami

मरज्यादा पुरुष प्रभु श्री रामचंद्र अहंकारी लंका पति राबण का बोध किये थे ।

भगबान बिष्नु यानि श्रीकृष्ण ने लंकापति राबण की अहंकार को ध्वंश करने केलिए और उसे मुक्ति दिलाने केलिए राम के रूप में धरित्री पर अबतर लिए थे ।

भगबान राम, राबण को बोध करके लंका बाशीको मुक्त करने के साथ पुरे पृथिबी को उसकी अत्याचार से मुक्त करि ।

राबण की ऊपर राम का बिजय प्राप्ति करने की खुशीमे बिजया दशमी दशहरा का त्यहार मनाया जाता हे और एक पुराण की गाथा के अनुसार दशमी के दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का बोध की थी इसीलिए ये पर्ब मनाया जाता हे ।

इस शाल दशहरा कब मनाया जाएगा

पंचांग पुराण की अनुसार इस शाल दशहरा का पर्ब 5 October 2022 बुधबार को मनाया जानेबाला हे । इस पर्ब दीपाबलि के ठीक बिश (20) दिन आती हे ।

दशहरा का शुभ मुहूर्त कब

पंचांग पुराण की अनुसार 5 October 2022 बुधबार को दोपहर 2 बजकर 2 मिनिट से लेकर 2:48 मिनिट तक पूजा करने की सुभ मुहूर्त हे ।

दशहरा कैसे मनाया जाता हे ?

बिजया दशमी यानि दशहरा का त्यहार प्रभु श्रीराम की बिजय को यद् रखने केलिए मनाया जाता हे । उ

सी दिन कुछ लोक राबण (लंकापति असुर की राजा) उसकी भाई कुम्भकर्ण और उसीके पुत्र मेघनाद की बड़े बड़े पुतला बनाकर उन्हें जलाया जाता हे ।

कुछ लोककी कहना हे उसी दिन राक्षश की पुतला पर आग लगानेसे हमारे अंदर की बुराई ख़तम हो जाती हे ।

पूजा करने की तिथि

बिजय मुहूर्त – दोपहर 2:02 से 2:48 मिनिट की मध्ये (15 अक्टूबर 2021 सुक्रबार को )

अपर्णा पूजा – दोपहर 1:15 से 1:35 मधे (15 अक्टूबर 2021 सुक्रबार को )

दशमी तिथि सुरु – 14 अक्टूबर श्याम 06:52 को

दशमी तिथि समाप्त – 15 अक्टूबर श्याम 06:02 तक

श्रवण नक्षत्र प्रारंभ – 14 अक्टूबर सुभे 09:36 बजे

श्रवण नक्षत्र समाप्त – 15 अक्टूबर सुभे 09:16 बजा तक

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