कब से आरम्भ हुआ Diwali का त्योहार – How to celebrate Diwalli in Hindi

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क्या आप जानते हो नहीं तो आज आप जानेंगे कब से आरम्भ हुआ Diwali का त्योहार – How to celebrate Diwalli in Hindi के बारे में ।

बहुत सारे लोग कहते हे कि रामायण काल ​​में राम को अयोध्या आगमन के समय दिवाली मनाई गई थी, तब से यह त्योहार को पालन किया जाता हे, लेकिन इस त्योहार से जुड़े कई अन्य तथ्य भी हे जो बहत कम लोक जानते हे ।

दिवाली का पर्ब भारत में प्राचीन काल में देव, दैत्य, दानव, राक्षस, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नाग, विद्याधर आदि अनेक प्रकार की जातिओं के द्वारा मनाई जाती थी ।

इन्हीं में से एक जाति के लोगों का यह पर्व था जिसका नाम था यक्ष । ना ही जक्ष गंधर्व भी उनके साथ इस पर्व को मनाते थे ।

ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात यक्ष अपने राजा कुबेर के साथ विलासिता में और अपनी यक्षिणियों के साथ भोग-विलास में मौज करती थी ।

दीपावली सभ्यता के विकास के साथ ही यह पर्व मानव बन गया और इस अवसर पर धन के देवता कुबेर के स्थान पर धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की गई है।

इसका कारन कुबेर जी की मान्यता केवल यक्ष जातियों में थी लेकिन लक्ष्मी जी की देवताओं और मानव जाति ।

आज कई जगहों पर लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ दीपावली के दिन कुबेर का भी पूजा की जाती हे ।

ऐसा कहा जाता हे कि भव-संप्रदाय के लोगों द्वारा माता लक्ष्मी लक्ष्मी और धन देबता कुबेर के साथ गणेश की पूजा की जाती हे ।

उन्होंने गणेश को रिद्धि-सिद्धि के दाता के रूप में सम्मानित किया, तार्किक आधार पर देखा जाए तो कुबेर जी ही धन के स्वामी जबकि गणेश जी पूर्ण ऋद्धि-सिद्धि के दाता माना जाता हे ।

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History of Diwali in Hindi

सभी पर्ब को पालन करने की पीछे कुछ ना कुछ कारन होती हे इसी तरह दिवाली पालन करने की पीछे भी एक रोचक और रोमांचक कहानी होतीहै चलिए जानते हे इसकी बारे में संखिप्त रूप में ।

माता लक्ष्मी की कहानी

माता लक्ष्मी को ना ही केवल धन का देबि माना जाता हे बल्कि ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की भी देबि भी माना जाता हे।

इसलिए कालान्तर में लक्ष्मी-गणेश का सम्बन्ध लक्ष्मी-कुबेर से अधिक निकट आने लगा ।

और एक कहाबत हे दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा के संबंध का कारण इस दिन लक्ष्मी और विष्णु का विवाह संपन्न होना माना जाता इसी कारन से ये त्यहार को माना जाता हे ।

राजा बलि की कहानी

कहा जाता हे कि दीपावली का त्योहार सबसे पहले राजा बली के समय से शुरू हुआ था जब विष्णु ने तीनों लोकों को तीन चरणों में मापा ।

बलि राजा की दानशीलता से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य दिया, साथ ही आश्वासन दिए कि देश के लोग उनकी याद में हर साल दिवाली मनाएंगे ।

ऐसा मन्ना हे की उसी दिन से दीपोत्सव का त्योहार शुरू हो गया ।

ये भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और देबराज इंद्र ने अब स्वर्ग सुरक्षित जानकर खुशी के साथ दिवाली दिप जाल कर मनाई थी ।

लक्ष्मी और काली की कहानी

जब असुर और देबता के बिच मेंसमुद्र मंथन हुई उसी समय लक्ष्मी और धन्वंतरि प्रकट हुए थे, उसी दिन मां काली भी प्रकट हुई थीं ।

इसलिए दीपाबलि के दिन काली और लक्ष्मी दोनों की पूजा एक साथ की जाती हे इसीलिए इसी दिन दिप जाल कर दीपोत्सव मनाया जाता हे।

ये भी एक कारन हे कि लक्ष्मी और भगबान विष्णु का विवाह भी दिवाली की रात को हुई थी ।

रामायण युग की कहानी

रामायण युग में भी Diwali पालन करने का एक रोचक कहानी हे ।

जब 14 वर्ष का वनवास पूरा कर भगवान श्रीराम पुन: लौट आए तब व पहले अयोध्या ना आकर सीधे नंदीग्राम गए और वहां कुछ दिन रहने के बाद दीपावली के दिन उन्होंने अपनी राज्य अयोध्या में प्रवेश किया।

इसी कारन उसी दिन दिप लगाकर राज्य को सजाया गया था तब से ये दिप जलने की परंपरा हे । प्रभु श्री राम के अयोध्या आगमन के खुसी में अजध्या बसी दीपोत्सव मनाये थे ।

Diwali in Hindi

महाभारत युग में दिवाली की पूजा

जब श्री कृष्ण ने इंद्र पूजा का विरोध किया और गोवर्धन पूजा के रूप में अन्नकूट (खाने-पीने की चीज़) की परंपरा शुरू करि ।

यानी उनकी प्रचुर मात्रा में उपलब्धता। वैसे भी श्री कृष्ण-बलराम कृषि के देवता हे । उनके द्वारा निभाई गई अन्नकूट परंपरा अभी भी दिवाली त्योहार का एक हिस्सा हे ।

यह त्यौहार आमतौर पर दीपावली के दूसरे दिन प्रतिपदा के तिथि में मनाया जाता हे ।

पहले Diwali का त्योहार इंद्र और कुबेर पूजा से जुड़ा था, कहा जाता है कि दिवाली से एक दिन पहले श्री कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध किया था जिसे नरक चतुर्दशी कहा जाता हे ।

इसी खुशी में अगले दिन अमावस्या के दिन गोकुल वासियों ने दीप जलाकर खुशी का इजहार किया । दूसरी घटना श्रीकृष्ण द्वारा पारिजात वृक्ष को सत्यभामा में लाने से संबंधित हे ।

यह भी कहा जाता हे कि दिवाली के दिन को भगवान कृष्ण ने महाभारत के युद्ध की शुरुआत के दिन के रूप में चुना था, लेकिन इसका कहीं भी कहानी उल्लेख नहीं ।

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आज आपने क्या सीखा

मुझे उम्मीद हे आपको कब से आरम्भ हुआ Diwali का त्योहार – How to celebrate Diwalli in Hindi से जुड़े कहानी अच्छा लगी होगी ।

यदि इसी लेखा में कुछ गलत नजर आया तो मुझे कमेंट करके जरूर बताये और में आपको एक बिनती हे इसी पोस्ट को दीपाबलि से पहले  जितना अधिक हो सके आपकी सोशल मीडिया अकाउंट (Facebook, Whatapps, Telegram) पर शेयर करे जिसके द्वारा दूसरे ब्यक्ति भी ये त्यहार के बारे में जान पाएगी ।


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