Sital Sasthi Festival 2022 – सीतल षष्ठी 2022 क्यों और कब मनाया जाता है

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सबसे पहले में आपको बता देना चाहती हूँ India, Odisha, Smabalpur, Sital Sasthi Festival 2022 – सीतल षष्ठी 2022 क्यों और कब मनाया जाता है । इसे शिब बिबाह भी कहते है।

सीतल षष्ठी 2022 तिथि उत्तर भारतीयों और शिव भक्त के लिए एक महत्वपूर्ण तिथि है। इसी शाल सीतल षष्ठी 2022 तिथि जून महीना में हो रही है जो आगे डिटेल्स में इसके बारे में अपलोड की गई है।

क्या आप जानते है यह पर्ब हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण opportunity है क्योंकि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का दिव्य विवाह (divine marriage) हुआ था।

यदि आप सीताल षष्ठी 2022 तिथि के बारे में साडी जानकारी बिस्तर में जानना चाहते है तो इस लेख को अंत तक पढ़े।

Sital Sasthi 2022

दोस्तों शिब बिबाह यानि सीतल षष्ठी ओडिशा में मनाए जाने वाले भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह समारोह है। जो ओडिशा राज्य की सम्बलपुर जिल्ला में होती है । इसी पर्ब केलिए पूरा राज्य जनजाता है ।

केबल इतना ही नहीं की ये केबल सम्बलपुर में मनाया जाता है । इसके अलावा कोई सारे जिल्ला और राज्य में बड़ी धूम धाम से पालन की जाती है ।

इसी शाल सीतल षष्ठी 2022 जून 5 तारीख है। यह त्योहार ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन शुरू होता है। सबसे प्रसिद्ध शीतला षष्ठी यात्राओडिशा के संबलपुर में आयोजित की जाती है।

प्रतीकात्मक/typical रूप से, भगवान शिव गर्मी की चिलचिलाती/scorching गर्मी का प्रतिनिधित्व करते हैं और देवी पार्वती पहली बारिश का Representation करती हैं। ऐसा माना जाता है कि grand wedding अच्छे मानसून/monsoon के लिए होती है।

सीताल षष्ठी, भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह उड़ीसा में उत्कल ब्राह्मणों (Utkal Brahmins) का एक प्रमुख त्योहार है।

उत्कल श्रोत्रिय वैदिक ब्राह्मणों (Utkal Shrotriya Vedic Brahmins) को पुरी से लाने के बाद संबलपुर के राजा द्वारा त्योहार शुरू किया गया था। यह उत्सव एक carnival के रूप में होता है।

जहां विभिन्न कलाकार भाग लेते हैं और उत्सव को और अधिक सुंदर और रंगीन बनाते हैं। ये त्यहार गर्मी के मौसम के अंत में वर्षा भगवान की पूजा करने के लिए उन्हें चिलचिलाती गर्मी (scorching hot) से बचाने के लिए मनाया जाता है।

Sital Sasthi 2022 Date और मुहूर्त

Sital Sasthi त्यहार इसी शाल ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष (चंद्रमा का वैक्सिंग चरण) के छठे दिन यानि षष्ठी के दिन को मनाया जाता है। शिब और माता पारबती की दिव्य जोड़े की यह घर वापसी की बारात देश के सबसे पुराने सांस्कृतिक कार्निवलों (cultural carnivals) में से एक मानी जाती है।

सीतल षष्ठी 6 जून 2022 को मनाई जाएगी। यह वह तिथि है जिस दिन हर शाल भगवान शिव और देवी पार्वती का दिव्य विवाह होता है। यह दिन पारंपरिक हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष के समय षष्ठी से छठे दिन आता है।

बड़ी आनंद उल्लास के रूप में, सीताल षष्ठी मनाई जाती है। इस दिन, विभिन्न प्रकार की पृष्ठभूमि के कलाकार और लोग समारोहों को मनाने के लिए एकजुट होते हैं।

सीताल षष्ठी का हिंदू त्योहार लोगों के कुछ समूहों/group द्वारा मनाया जाता है, जो समूह के सुंदर रंग लाते हैं। यह मुख्य रूप से उड़ीसा के संबलपुर जिले में मनाया जाता है। सीताल षष्ठी पर समारोह में शामिल होने के लिए काफी संख्या में पर्यटक आते हैं।

सीताल षष्ठी की कथा, सीताल षष्ठी 2022 के अनुष्ठान और शुभकामनाएं

सीताल षष्ठी महोत्सव को भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह समारोह के रूप में प्रत्येक शाल मनाया जाता है।

इसे सीतल षष्ठी यात्रा उत्सव (Setal Shashthi Yatra Festival) के रूप में मनाया जाता है और यह त्यौहार 5 दिनों की अवधि के लिए मनाया जाता है।

इस त्योहार में संबलपुर का एक परिवार पार्वती के पिता और दूसरा परिबार माता की भूमिका निभाता है। फिर वे शिव को पार्वती का हाथ देते हैं, जो विवाह का मुख्य अंग है। जैसे हम बिभा करते हैं ।

सायद आप ये जानते हँगे की भगवान शिव को स्वयंभू के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ होती है कि वे सीधे अपने माता-पिता के बिना आए थे। तो भगवान शिव के लिए माता-पिता के रूप में कोई नहीं खेलता है।

इस दिन हर कोई अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ अपनी शुभकामनाएं शेयर करेगा।

सीताल षष्ठी 2022 अनुष्ठान(ritual)

सीतल षष्ठी तिथि 2022 शैव समुदाय के हिंदुओं द्वारा एक बहुप्रतीक्षित विषय है। इस त्योहार के पहले दिन को पात्र पेंडी कहा जाता है, जिस दिन चयनित परिवार पार्वती को गोद लेंगे। इस दिन पार्वती की मूर्ति स्वीकृत माता-पिता के घर आती है।

फिर इस अनुष्ठान के एक भाग के रूप में, रात के समय दुल्हन की मूर्ति को विवाह समारोह के लिए ले जाया जाता है। इस बीच, भगवान शिव, अन्य हिंदू देवी-देवताओं के साथ, उस स्थान पर आते हैं जहां विवाह होता है।

पवित्र यात्रा का नेतृत्व भगवान हनुमान और भगवान नरसिंह कर रहे हैं। इस विवाह में सभी औपचारिक रीति-रिवाजों और customs को एक दिव्य तरीके से शामिल किया गया है।

सीताल षष्ठी उत्सव को Celebration कैसे करते हैं

होन्दु परंपरा के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन उक्त अनुष्ठान किया जाता है। इस अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती के माता-पिता का भी चयन होता है।

थला उठा अनुष्ठान में, फूल और बेल के पत्तों को एक डिस्क पर रखा जाता है जहां भक्त उत्सव के आयोजन के लिए दान करते हैं। यह अनुष्ठान आगामी त्योहार के लिए धन उगाहने की शुरुआत का प्रतीक है।

जिसमें प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर धन इकट्ठा करते हैं। यह त्योहार शादी के दूसरे और आठवें दिन के बीच मनाया जाता है। इस बीच, जात्रा समितियां और दंपति का परिवार जो देवी के माता-पिता होंगे, उत्सव की तैयारी शुरू कर देंगे।

सीताल षष्ठी वह त्योहार है जिसमें भगवान शिव और देवी पार्वती को दो परिवारों द्वारा गोद लिया जाता है और उनका विवाह होता है। और बाद में वे एक बारात में मंदिर लौट जाते हैं। आजकल विवाह प्रक्रिया की तरह ही rituals निभाई जाती हैं, त्योहार बड़े उत्साह और खुशी के साथ किया जाता है।

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मुझे बिस्वाश है आप Sital Sasthi 2022 – सीतल षष्ठी 2022 क्यों और कब मनाया जाता है के बारे में बहत कुछ सिख चुके होंगे । यदि आप पढ़ते पढ़ते अंत तक आ चुके होंगे ।

इसी प्रकार की नॉलेज के साथ पैसा कमानेका कोई सारे तरीका के बारे में जनकारी पाने केलिए नोटिफिकेशन को on करके रखना ना भूले । इसी पोस्ट को अपने यारों दोस्त के साथ साझा करना ना भूले, धन्यवाद


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